Sochaa Naa Tha Kabhi / सोचा ना था कभी (Poetry On Love)


Sochaa Naa Tha Kabhi / सोचा ना था कभी (Poetry On Love)    सोचा ना था कभी, ज़िंदगी के सफर में, हो जाएगा इश्क मुझे  लगता था जो बेफ़िजूल, डूब जाऊँगा उसमे, इल्म नहीं था मुझे  आलम कुछ है ऐसा अब, हटती नहीं नजरें तेरे चेहरे से सनम  कर पाता नहीं बर्दाश्त पल भर की भी जुदाई तुझसे, आजकल  ये इश्क है, या रोग कोई लाइलाज, देता है जो तकलीफ़ बेशुमार  ढूँढता हूँ इसका इलाज, कभी इस गली – कभी उस गली रोजाना  पर मिलता नहीं कोई दवाखाना, ना ही मिलता कोई वैध, हकीम  ना देख कोई विकल्प, करता हूँ खुद को समर्पित, तेरे प्यार में  तू ही ज़िंदगी है मेरी, हो गया है इश्क तुझसे, करता हूँ मंजूर   तुझ बिन अब ज़िंदगी है मेरी नामुमकिन, करता हूँ स्वीकार   सोचा ना था कभी, ज़िंदगी के सफर में, हो जाएगा इश्क मुझे  लगता था जो बेफ़िजूल, डूब जाऊँगा उसमे, इल्म नहीं था मुझे                                      -दीपिका जैन



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Sochaa Naa Tha Kabhi / सोचा ना था कभी (Poetry On Love)


सोचा ना था कभी, ज़िंदगी के सफर में, हो जाएगा इश्क मुझे

लगता था जो बेफ़िजूल, डूब जाऊँगा उसमे, इल्म नहीं था मुझे

आलम कुछ है ऐसा अब, हटती नहीं नजरें तेरे चेहरे से सनम

कर पाता नहीं बर्दाश्त पल भर की भी जुदाई तुझसे, आजकल

ये इश्क है, या रोग कोई लाइलाज, देता है जो तकलीफ़ बेशुमार

ढूँढता हूँ इसका इलाज, कभी इस गली कभी उस गली रोजाना

पर मिलता नहीं कोई दवाखाना, ना ही मिलता कोई वैध, हकीम

ना देख कोई विकल्प, करता हूँ खुद को समर्पित, तेरे प्यार में

तू ही ज़िंदगी है मेरी, हो गया है इश्क तुझसे, करता हूँ मंजूर 

तुझ बिन अब ज़िंदगी है मेरी नामुमकिन, करता हूँ स्वीकार 

सोचा ना था कभी, ज़िंदगी के सफर में, हो जाएगा इश्क मुझे

लगता था जो बेफ़िजूल, डूब जाऊँगा उसमे, इल्म नहीं था मुझे

                                    -दीपिका जैन 



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