Pushpon Se Susazzit / पुष्पों से सुसज्जित ( Poetry On Garden)

Pushpon Se Susazzit / पुष्पों से सुसज्जित ( Poetry On Garden)    हर  तरफ नजर आ रहे हैं  फूल लाल, गुलाबी   पूरी फुलवारी रंग-बिरंगे पुष्पों  से सुसज़्ज़ित है   बढा रही है दूर्वा हरी-हरी शोभा इस उपवन की   कही कोई तरूवर विशाल मुस्कुरा रहा है मंद-मंद  तो एकाएक  सुनाई देता कलरव पक्षियों का मधुर   यक़ीनन बेहद ही ख़ूबसूरत है नज़ारा ये कुदरत का   ढलते ही शाम बढ जाती है सुन्दरता इस मंज़र की   उछलकूद-कर मचाते जब शोर बच्चें नन्हे-नन्हें   कही कोई बच्चा मुस्कराता, तो कोई बहाता आँसू   कोई करता शरारत, रहता कोई शान्त उपवन में   हो रहा है खुदा भी आनन्दित देख द्रश्य ये अद्भुत   कर रही है अनुभूति गौरव की धरा, शब्दहीन है ये  हर  तरफ नजर आ रहे हैं  फूल लाल, गुलाबी   पूरी फुलवारी रंग-बिरंगे पुष्पों  से सुसज़्ज़ित है                                                -दीपिका जैन

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 Pushpon Se Susazzit / पुष्पों से सुसज्जित ( Poetry On Garden)


हर  तरफ नजर आ रहे हैं  फूल लाल, गुलाबी 

पूरी फुलवारी रंग-बिरंगे पुष्पों  से सुसज़्ज़ित है 

बढा रही है दूर्वा हरी-हरी शोभा इस उपवन की 

कही कोई तरूवर विशाल मुस्कुरा रहा है मंद-मंद

तो एकाएक  सुनाई देता कलरव पक्षियों का मधुर 

यक़ीनन बेहद ही ख़ूबसूरत है नज़ारा ये कुदरत का 

ढलते ही शाम बढ जाती है सुन्दरता इस मंज़र की 

उछलकूद-कर मचाते जब शोर बच्चें नन्हे-नन्हें 

कही कोई बच्चा मुस्कराता, तो कोई बहाता आँसू 

कोई करता शरारत, रहता कोई शान्त उपवन में 

हो रहा है खुदा भी आनन्दित देख द्रश्य ये अद्भुत 

कर रही है अनुभूति गौरव की धरा, शब्दहीन है ये

हर  तरफ नजर आ रहे हैं  फूल लाल, गुलाबी 

पूरी फुलवारी रंग-बिरंगे पुष्पों  से सुसज़्ज़ित है 


                                            -दीपिका जैन

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