Khel Hai Azab / खेल है अजब ( Poetry On Life )

 

Khel Hai Azab / खेल है अजब ( Poetry On Life )   किसी की सूरत करती आकर्षित, किसी की सीरत  कोई ताउम्र राज करता दिल पे, तो कोई कुछ क्षण  किसी की मुस्कान में होता जादू, किसी की बातों में  कोई काम आता वक्त पड़ने पर, कोई लेता मुँह मोड  किसी से मिलकर मिलता सुकून, किसी से होता अफसोस  कोई बिछाता राहों में फूल सुगंधित, कोई काँटे अनगिनीत  विचित्र है विडंबना, मिलता कोई सज्जन, तो कोई दुर्जन  किसी की पहचान करना होता आसां, तो किसी की मुश्किल  जीवन का है ये खेल अजब, हर शख्स को खेलना है जरूरी    कभी लिए होंठों पे मुस्कान, तो कभी लिए आँखों में नमी                                     -दीपिका जैन


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Khel Hai Azab / खेल है अजब ( Poetry On Life )


किसी की सूरत करती आकर्षित, किसी की सीरत

कोई ताउम्र राज करता दिल पे, तो कोई कुछ क्षण

किसी की मुस्कान में होता जादू, किसी की बातों में

कोई काम आता वक्त पड़ने पर, कोई लेता मुँह मोड

किसी से मिलकर मिलता सुकून, किसी से होता अफसोस

कोई बिछाता राहों में फूल सुगंधित, कोई काँटे अनगिनीत

विचित्र है विडंबना, मिलता कोई सज्जन, तो कोई दुर्जन

किसी की पहचान करना होता आसां, तो किसी की मुश्किल

जीवन का है ये खेल अजब, हर शख्स को खेलना है जरूरी  

कभी लिए होंठों पे मुस्कान, तो कभी लिए आँखों में नमी

                                   -दीपिका जैन

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