Naa Karwao Baal Shram / ना करवाओ बाल श्रम ( Poetry On World Day Against Child Labour)
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Naa Karwao Baal Shram / ना करवाओ बाल श्रम ( Poetry On World Day Against Child Labour)
आता है तरस सोच पे उनकी, निर्भर हैं जो बाल श्रम पर
है गुजारिश, ना डालों बोझ धनोपार्जन का नन्हे-मुन्नों पर
हक है इन बच्चों का खेल-कूद पे, छीनो ना तुम उनसे ये
जीनें दो इनको बचपन, लौटकर नहीं आएगा फिर दुबारा ये
चंचलता, नटखटता, शैतानियाँ, करने का रखते हैं हक ये
बिना किसी जिम्मेदारी के जीवन जीने के अधिकारी हैं ये
आता है तरस सोच पे उनकी, निर्भर हैं जो बाल श्रम पर
है गुजारिश, ना डालों बोझ धनोपार्जन का नन्हे-मुन्नों पर
दो हाथ में कलम इनके, जिससे शिक्षा प्राप्त कर पाए ये
उच्च श्रेणी में उत्तीर्ण हो, नाम तुम्हारा रोशन कर पाए ये
बन डॉक्टर, इंजीनियर, वकील गौरान्वित कर पाए तुम्हें ये
दो इन्हे कुछ ऐसे संस्कार, दिल से देश की सेवा कर पाए ये
आता है तरस सोच पे उनकी, निर्भर हैं जो बाल श्रम पर
है गुजारिश, ना डालों बोझ धनोपार्जन का नन्हे-मुन्नों पर
-दीपिका जैन

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