Yaad Hai Woh Shan / याद है वो क्षण ( Poetry On Friendship)
Yaad Hai Woh Shan / याद है वो क्षण ( Poetry On Friendship)
याद है वो क्षण आज भी, डूब रहा था पानी
में, तैराकी से अज्ञान
बढ़ा एक हाथ मेरी ओर अंजान, ले आया जो
खींचकर किनारे पर
लोगों की भीड़ में, कौन है वो, क्या है
उससे रिश्ता, इल्म नहीं था
पर लगता था वो अपना-सा, सोचा, शायद हो
कोई पुराना जानकार
कर शुक्रिया उसका, माँगा जब परिचय, तो मुस्कुरा
बोला वो धीमे से
ना है कोई नाता, ना ही रिश्ता अपना,
फिर भी है साथ हमारा दिल का
समझना ना अकेला खुद को जीवन की किसी
डगर पे, हूँ दोस्त तुम्हारा
छोड़ दे चाहे ये ज़माना साथ, छोड़ूँगा ना मैं
कभी, आए मुश्किलें हज़ार
ना हुआ यकीं किस्मत पे खुद की, मिलने
पर एक साथी सुख-दुख का
सुने थे किस्से दोस्ती के बेशुमार, मैं
भी बनूँगा एक दिन नायक इसका
आएगा कोई ज़िंदगी में मेरी बनकर
फरिश्ता, कहलाएगा जो दोस्त मेरा
निभाएगा जो दोस्ती शिददत से, मालूम
नहीं था रहस्य ये हयात का
-दीपिका जैन

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