Digital Duniya Ka Gulam / डिजिटल दुनिया का गुलाम (Poetry On Digital World)
Digital Duniya Ka Gulam / डिजिटल दुनिया का गुलाम (Poetry On Digital World)
हर शख्स मोबाईल के सामने नज़र आता है
वो डिजिटल दुनिया का गुलाम नज़र आता है
सुविधा हो इंटरनेट की तो वारे-न्यारे हो जाते है
मोबाईल पर टाइप कर संदेश, रिश्ते निभाता है
हर ख़बर सोशल-मीडिया के जरिए लेता, व देता है
कभी बना विडिओ, कभी ले फोटो यादें सँजोता है
ऑनलाइन पेमेंट कर घर बैठे खरीदी कर लेता है
मोबाईल के माध्यम से मँगवा भोजन पेट भर लेता है
गजब है, मोबाईल के जरिए तो मैड भी बुलवा लेता है
सभी सुविधायें मिनटों में ऑनलाइन बुक कर् लेता है
जाना हो कहीं तो एप के जरिए कैब बुलवा लेता है
सबसे ज्यादा गूगल मैप पर विश्वास दिखाता है
वो भी, चाहे आए अड़चने, मंजिल तक पहुँचाता है
इतना ही नहीं, इंसान का मौजूदा स्थान भी बताता है
हर शख्स मोबाईल के सामने नज़र आता है
वो डिजिटल दुनिया का गुलाम नज़र आता है
-दीपिका जैन

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