Aasman Mein / आसमाँ में ( Poetry On Dream )
Aasman Mein / आसमाँ में ( Poetry On Dream )
देखती हूँ जब पंछियों का काफिला उड़ते हुए, आसमाँ में
जी करता मेरा भी उड़ने का स्वच्छन्द रूप से, आसमाँ में
कहता है दिल बार-बार कहीं खो जाऊँ मैं, इस आसमाँ में
पल भर में भूल जाऊँ जीवन की सभी तशवीश, आसमाँ में
ना लौटूँ कभी ज़मीं पे, घर बसाऊँ एक अद्भुत आसमाँ में
दिल से है चाह, हर ओर हो भीड़ बादलों की मेरे, आसमाँ में
कभी छू लूँ चाँद, तो कभी तारें, कभी खेलूँ यूँ ही आसमाँ में
निहाऊँ जब धरा, उपवन, और वादियाँ, मुस्कुराऊँ आसमाँ में
यूँ तो ख्वाब है ये विचित्र मेरा, फिर भी चाहूँ उड़ना आसमाँ में
बनाऊँ एक अम्बर, ज़मीं पे मेरा, और पंख फ़ैला
देखूँ आसमाँ में
-दीपिका जैन

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