Main Khud Bhi Sochta Hun....../ मैं खुद भी सोचता हूँ......(Javed Akhtar poetry)
Main Khud Bhi Sochta Hun....../ मैं खुद भी सोचता हूँ......(Javed Akhtar poetry)
मैं ख़ुद भी सोचता हूँ ये क्या मेरा हाल हैजिस का जवाब चाहिए वो क्या सवाल हैघर से चला तो दिल के सिवा पास कुछ न थाक्या मुझ से खो गया है मुझे क्या मलाल हैआसूदगी से दल के सभी दाग़ धुल गएलेकिन वो कैसे जाए जो शीशे में बाल हैबे-दस्त-ओ-पा हूँ आज तो इल्ज़ाम किस को दूँकल मैं ने ही बुना था ये मेरा ही जाल हैफिर कोई ख़्वाब देखूँ कोई आरज़ू करूँअब ऐ दिल-ए-तबाह तिरा क्या ख़याल है।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें