Ho Raha Ehsaas Sard / हो रहा एहसास सर्द (Poetry On Winter Session)
बदल रही है रुत, हो रहा एहसास सर्द
दी है दस्तक जाड़े ने, स्वागत है उसका
लगती अब धूप उत्तम, राह देखते भानु की
निकल गए कंबल, रजाइयाँ, और स्वेटर भी
आया मौसम जायकेदार विविध पकवानों का
लाया घर-घर में रेवड़ी, गज़क, और मूँगफली
बाज़रे, एवं मक्के से बने व्यंजन भिन्न-भिन्न
बढ़ जाती ठिठुरन साँझ ढले, जल जाते अलाव,
जम जाती महफ़िल संग अपनों के, होता हँसी-मज़ाक
बदल रही है रुत, हो रहा एहसास सर्द
दी है दस्तक जाड़े ने, स्वागत है उसका
-दीपिका जैन

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