Koi Adheer- Koi Gambhir / कोई अधीर- कोई गंभीर (Poetry On Happy Children's Day 2025)
कोई अधीर, कोई गंभीर, अलग-अलग मिज़ाज के होते बच्चें
कुछ तो आँखों से ही शरारती नजर आते बच्चें
तो कुछ अक्सर एक गहरी सोच में डूबें रहते बच्चें
भिन्न-भिन्न है फ़ितरत, फिर भी सबको अज़ीज़ होते बच्चें
मधुर वाणी के स्वामी, सबके दिलों पे छाए रहते बच्चें
मासूमियत भरी बातों से सबका दिल बहलाए रहते बच्चें
रोशन रहता इनसे घर-आँगन, परिवार की रौनक होते बच्चें
दुख-तकलीफ में अपनी मासूम बातों से मरहम लगाते बच्चें
निकले किसी के आँसू तो नन्हे-नन्हे हाथों से पोंछ
देते बच्चें
यकीनन जीवन में आयी हर एक खुशी की वजह होते बच्चें
हर तरफ अपनी हँसी बिखेरने वाले खुदा कि रहमत होते बच्चें
Happy
Children’s Day
-दीपिका जैन

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