Holi hai ! / होली है ! (Poetry On Holi)
Image by atish lowanshi from Pixabay
होली है !
आई रे फाल्गुन की बहार, मुबारक हो होली का त्योहार
रंगों का त्योहार, लाल, पीली, हरी, गुलाबी गुलाल
रंगतें हुए बाँध रही हर जन को एकता के सूत्र में
ना कोई बैर, ना ही भाव ईर्ष्या का किसी के मन में
देखो कितना प्यारा है ये होली का रंगों से भरा त्योहार
बनती कहीं गुजिया, कांजी, ठंडाई तो कहीं ढेरों पकवान
रहते सब मस्ती में, खेलते होली मिलजुल संग पीते भांग
कोई चलाता पानी की पिचकारी, कोई लगाता सुखी गुलाल
कदम-कदम पर आ रहीं नज़र खुशियाँ ये ही जीवन का सार
नही नामोंनिशान गमों का आज, कितना अच्छा है ये मंगलकाज
आई रे फाल्गुन की बहार, मुबारक हो होली का त्योहार
-दीपिका जैन

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