Happy Women's Day / महिला दिवस की शुभकामनाएं (Poetry On Women's Day 2025 )
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Happy Women's Day / महिला दिवस की शुभकामनाएं (Poetry On Women's Day 2025 )
धरती पर लेते ही जन्म तिरस्कार का पात्र बनी
नकार दिया सब जन ने ये कैसी विडम्बना बनी
कुछ से तो छीन लिया हक दुनिया में आने का
कुछ को आते ही धरा पे मार दिया जालिमों ने
किस्सा ये दर्द भरा कोई अफ़साना नहीं हकीकत है
जगत जननी नारी के जीवन का एक कडवा सच है
धरती पर लेते ही जन्म तिरस्कार का पात्र बनी
नकार दिया सब जन ने ये कैसी विडम्बना बनी
लेकिन अब धीरे-धीरे बदल रहा है नजरिया लोगों का
देने लगें है सम्मान स्त्री वर्ग को किन्तु गति ये धीमी है
कहीं छू रहीं लडकियाँ आसमां, कहीं कर रहीं घूंघट हैं
बदलेगी सोच सबकी, हर महिला करती ये ख्वाहिश है
धरती पर लेते ही जन्म तिरस्कार का पात्र बनी
नकार दिया सब जन ने ये कैसी विडम्बना बनी
अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.
-दीपिका जैन

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