Wo Mera Dost Hai / वो मेरा दोस्त है (Poetry On Friendship)

Wo Mera Dost Hai / वो मेरा दोस्त है (Poetry On Friendship)  कुछ कहा कुछ नहीं फिर भी हर बात समझ जाता है  मेरे दिल के जज़्बात मुझसे पहले तो वो जान जाता है  लगती है चोट मुझे ना जाने क्यों दर्द से वो कराहता है    लगता है कई बार ज़िंदगी का सफ़र उस बिन अधूरा है  यकीनन इस दुनिया में अस्तित्व उसका मेरे ही लिए है  उसके लिए रिश्ते ओर भी हैं निभाने को फिर भी वो मेरा है  मेरी हर जरूरत में लबों पे लिए मुस्कान वो मेरे पास है  अब और क्या लिखूँ उसके बारे में शब्दों का आभाव है  वो मेरा दोस्त है बस इतना परिचय ही उसका काफी है  कुछ कहा कुछ नहीं फिर भी हर बात समझ जाता है  मेरे दिल के जज़्बात मुझसे पहले तो वो जान जाता है  -दीपिका जैन

Image by Sajjad Saju from Pixabay




Wo Mera Dost Hai / वो मेरा दोस्त है (Poetry On Friendship)

कुछ कहा कुछ नहीं फिर भी हर बात समझ जाता है

मेरे दिल के जज़्बात मुझसे पहले तो वो जान जाता है

लगती है चोट मुझे ना जाने क्यों दर्द से वो कराहता है  

लगता है कई बार ज़िंदगी का सफ़र उस बिन अधूरा है

यकीनन इस दुनिया में अस्तित्व उसका मेरे ही लिए है

उसके लिए रिश्ते ओर भी हैं निभाने को फिर भी वो मेरा है

मेरी हर जरूरत में लबों पे लिए मुस्कान वो मेरे पास है

अब और क्या लिखूँ उसके बारे में शब्दों का आभाव है

वो मेरा दोस्त है बस इतना परिचय ही उसका काफी है

कुछ कहा कुछ नहीं फिर भी हर बात समझ जाता है

मेरे दिल के जज़्बात मुझसे पहले तो वो जान जाता है

-दीपिका जैन

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट