Khwaab Se Haqiqat / ख्वाब से हक़ीक़त (Poetry On Love )
Khwaab Se Haqiqat / ख्वाब से
हक़ीक़त (Poetry On
Love)
हुए है दीदार जब से तेरे जश्न-ए-महफ़िल में
तेरे प्यार का जादू कुछ ऐसा चला है मुझ पर
हर वक्त सोचता हूँ तुझे, देखता हूँ ख्वाब तेरे
कभी तेरे अधरों की मुस्कुराहट में खो जाता हूँ
तो कभी तेरी आँखों की गहराइयों में डूब जाता हूँ
नजर आती है तू ख्वाब में मुझसे बातें करती हुई
कहते है साथी मेरे, हो गया हूँ मैं पागल तेरे प्यार में
तू हकीकत नहीं बन सकती, बस एक ख्वाब है मेरा
यकीनन जल्द ही चाहता हूँ सच करना ख्वाब ये मेरा
हो जाए तू शामिल मेरी ज़िंदगी में माँगता हूँ ये दुआ
-दीपिका जैन

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें