Angan Wo / आँगन वो (Poetry On Childhood)
याद आते हैं बहुत
बीते हुए वो पल
आती थी मुस्कान
वजह से जिनकी
वजह थी खुशियों
की वो मेरी यकीनन
होता था उन पलों
में रूठना-मनाना निरंतर
फिर भी अनमोल
थे वो दिन मेरी ज़िंदगी के
नि:संदेह बचपन
था वो मेरा मासूमियत भरा
लेकिन उससे ज्यादा
आता है याद आँगन वो
गुजरा था जहाँ
प्यारा-सा बालपन मेरा
नहीं अब आँगन
वो बस यादें हैं उसकी
काश मुड़ जाए वक्त
पीछे, जीने हैं पल वो दोबारा
याद आते हैं बहुत
बीते हुए वो पल
आती थी मुस्कान वजह से जिनकी
-दीपिका जैन

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें