Mausam Baarish Ka / मौसम बारिश का ( Poetry On Rainy Season)
Mausam Baarish Ka / मौसम बारिश का (Poetry On Rainy Season)
बादलों की गड़गड़ाहट सुन, और देख चमकती बिजली
हो गया मन प्रसन्न, ये सोच बरसेंगी बूँदें मोतियों-सी
आ गया मौसम सावन का, खुशियों का लिए तोहफा
कहीं झूलती सखियाँ झूला, तो कहीं चलाते बालक नाव
बनाती ग्रहणियाँ विभिन्न पकवान, कभी चाट तो कभी पकौड़े
ढूँढते बच्चे अवसर इस ऋतु में स्कूल ना जाने का प्रतिदिन
बड़े भी कुछ कम नहीं, हैं बहाने पास उनके छुट्टी लेने के हजारों
लेकिन इन सब से भिन्न कुछ ऐसे भी है जो जाते घबरा देख बारिश
बढ़ जाती धड़कने सुन बादलों की गर्जन, तो कभी देख चमकती बिजली
सोचती हूँ कितना अद्भुत है ये, फिर भी करती इंतजार प्रतिवर्ष
वर्षा-ऋतु का
बादलों की गड़गड़ाहट सुन, और देख चमकती बिजली
हो गया मन प्रसन्न, ये सोच बरसेंगी बूँदें मोतियों-सी
-दीपिका जैन

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