Uljhan / उलझन (poetry On Confusion)

Uljhan / उलझन (Poetry On  Confusion)   ज़िंदगी ने एक ऐसे मोड़ पर लाकर किया है खड़ा मुझे  कर नहीं सकती मनस्थिति का वर्णन शब्दों में किसी से  मुस्कुराऊँ, या बहाऊँ आँसू कुछ समझ नहीं आ रहा मुझे  कोई तो बताए, कौन है वो जिससे बाँटू मैं मुश्किलें अपनी  यूँ तो हूँ परिचित इस बात से, कोई नहीं विपत्ति में किसी का  पर क्या मैं हूँ परेशानी में, या फिर है ये मेरी नकरात्मक सोच  ना कह सकती, ना पूछ सकती किसी से अजब है ये पहेली  लेकिन है यकीं खुदा पे, वो हटाएगा बादल असमंजस के जरूर  हट जाएगी धुंध सारी एक दिन, नज़रों के सामने से यकीनन  पर जब तक कैसे समझाऊँ मन को भटक रहा है जो इधर-उधर  क्या है इसका कोई उपचार, कोई तो लिखकर दे नुस्खा इसका  कर रही हूँ इंतजार उस वक्त का बेसब्री से, लिए उम्मीद बेशुमार  ज़िंदगी ने एक ऐसे मोड़ पर लाकर किया है खड़ा मुझे  कर नहीं सकती मनस्थिति का वर्णन शब्दों में किसी से          -दीपिका जैन


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Uljhan / उलझन (Poetry  On  Confusion)


ज़िंदगी ने एक ऐसे मोड़ पर लाकर किया है खड़ा मुझे

कर नहीं सकती मनस्थिति का वर्णन शब्दों में किसी से

मुस्कुराऊँ, या बहाऊँ आँसू कुछ समझ नहीं आ रहा मुझे

कोई तो बताए, कौन है वो जिससे बाँटू मैं मुश्किलें अपनी

यूँ तो हूँ परिचित इस बात से, कोई नहीं विपत्ति में किसी का

पर क्या मैं हूँ परेशानी में, या फिर है ये मेरी नकरात्मक सोच

ना कह सकती, ना पूछ सकती किसी से अजब है ये पहेली

लेकिन है यकीं खुदा पे, वो हटाएगा बादल असमंजस के जरूर

हट जाएगी धुंध सारी एक दिन, नज़रों के सामने से यकीनन

पर जब तक कैसे समझाऊँ मन को भटक रहा है जो इधर-उधर

क्या है इसका कोई उपचार, कोई तो लिखकर दे नुस्खा इसका

कर रही हूँ इंतजार उस वक्त का बेसब्री से, लिए उम्मीद बेशुमार

ज़िंदगी ने एक ऐसे मोड़ पर लाकर किया है खड़ा मुझे

कर नहीं सकती मनस्थिति का वर्णन शब्दों में किसी से


      -दीपिका जैन

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