Shuny Mein Taktaa Hun / शून्य में ताकता हूँ (Poetry On Life)


Shuny Mein Taktaa Hun / शून्य में ताकता हूँ  (Poetry On Life)    शून्य में ताकता हूँ, हर पल ना जाने क्या ढूँढता हूँ  ये वो पहेली है, जिसका हर घड़ी जवाब माँगता हूँ  यूँ तो है सबकुछ पास मेरे, फिर भी कुछ चाहता हूँ  शायद अपने लिए खुशियों से भरी ज़िंदगी माँगता हूँ  लगता है कभी, है वो पास मेरे, फिर क्या ताकता हूँ  ये कैसी असमंजस की स्थिति है, मैं नहीं जानता हूँ  कहते है सभी नादान मुझे, पर मैं ये नहीं मानता हूँ  जो चाहिए वो लेना जिद है मेरी, ये सबसे कहता हूँ  नकारा नहीं कभी गमों को शिद्दत से उन संग निभाता हूँ  मिले है ताउम्र आँसू, तो क्या खुशियाँ गलत माँगता हूँ  यकीनन हक है मेरा उन पर इतना तो मैं जानता हूँ    -दीपिका जैन

 



Shuny Mein Taktaa Hun / शून्य में ताकता हूँ  (Poetry On Life)


शून्य में ताकता हूँ, हर पल ना जाने क्या ढूँढता हूँ

ये वो पहेली है, जिसका हर घड़ी जवाब माँगता हूँ

यूँ तो है सबकुछ पास मेरे, फिर भी कुछ चाहता हूँ

शायद अपने लिए खुशियों से भरी ज़िंदगी माँगता हूँ

लगता है कभी, है वो पास मेरे, फिर क्या ताकता हूँ

ये कैसी असमंजस की स्थिति है, मैं नहीं जानता हूँ

कहते है सभी नादान मुझे, पर मैं ये नहीं मानता हूँ

जो चाहिए वो लेना जिद है मेरी, ये सबसे कहता हूँ

नकारा नहीं कभी गमों को शिद्दत से उन संग निभाता हूँ

मिले है ताउम्र आँसू, तो क्या खुशियाँ गलत माँगता हूँ

यकीनन हक है मेरा उन पर इतना तो मैं जानता हूँ


-दीपिका जैन 

 

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