Pahla Deedar / पहला दीदार (Poetry On Love)
मोहब्बत की खूबसूरती का एहसास हुआ तेरे दीदार से
अब ज़िंदगी गुजारना चाहता हूँ तुझ संग प्यार से
याद है मुझे वो पल हसीं, हुआ था जब रूबरू तुझसे
थम गया था वक्त मेरे लिए, यकीं नहीं हुआ नसीब पे
नज़र आएगी इतनी सुंदरता, सोचा ना था कभी मैने
क्या कहूँ क्या नहीं, बस इसी कशमकश में था उस क्षण
मोहब्बत की खूबसूरती का एहसास हुआ तेरे दीदार से
अब ज़िंदगी गुजारना चाहता हूँ तुझ संग प्यार से
कुछ यकीं था, कुछ थी स्थिति असमंजस की याद है मुझे
तू करेगी इंकार, या करेगी इकरार बस यही ड़र था लगातार
नि:संदेह वो खुशकिस्मती थी मेरी जो मैंने तुझे पा लिया
तुझ संग नाम अपना जोड़ खुद को मुकम्मल बना लिया
मोहब्बत की खूबसूरती का एहसास हुआ तेरे दीदार से
अब ज़िंदगी गुजारना चाहता हूँ तुझ संग प्यार से
-दीपिका जैन

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