Naari Ki Kahani / नारी की कहानी (Poetry On Women's Day)


Naari Ki Kahani / नारी की कहानी (Poetry On Women's Day)     कुछ ऐसे अल्फाजों से लिखी गयी है नारी की जिन्दगानी  समझ नही पाती वो खुद भी अपनी तक़दीर की कहानी     लेती है जन्म जिस घर, करती है उस आँगन में शैतानी   जुड जाती है जिस घर से उसके पल-पल की कहानी  सुनती है जब ये कथन वहाँ, हो गयी हो तुम अब सयानी   जाना है तुम्ह अब अपने घर, करना शुरू वहाँ नई कहानी     कुछ ऐसे अल्फाजों से लिखी गयी है नारी की जिन्दगानी  समझ नही पाती वो खुद भी अपनी तक़दीर की कहानी    होता है ब्याह उसका, बन जाती है किसी के घर की रानी  करती है शुरू जब लिखना, अपने जीवन की नई कहानी  सुनाई देते है कुछ ऐसे शब्द, सोचती है लिए आँखो मे पानी   कौनसा है घर मेरा, कहाँ लिखूँ मैं अपने जीवन की कहानी      कुछ ऐसे अल्फाजों से लिखी गयी है नारी की जिन्दगानी  समझ नही पाती वो खुद भी अपनी तक़दीर की कहानी    -दीपिका जैन


Naari Ki Kahani / नारी की कहानी (Poetry On Women's Day) 


कुछ ऐसे अल्फाजों से लिखी गयी है नारी की जिन्दगानी

समझ नही पाती वो खुद भी अपनी तक़दीर की कहानी 


लेती है जन्म जिस घर, करती है उस आँगन में शैतानी 

जुड जाती है जिस घर से उसके पल-पल की कहानी

सुनती है जब ये कथन वहाँ, हो गयी हो तुम अब सयानी 

जाना है तुम्हे अपने घर, करना शुरू वहाँ नई कहानी


 कुछ ऐसे अल्फाजों से लिखी गयी है नारी की जिन्दगानी

समझ नही पाती वो खुद भी अपनी तक़दीर की कहानी


होता है ब्याह उसका, बन जाती है किसी के घर की रानी

करती है शुरू जब लिखना, अपने जीवन की नई कहानी

सुनाई देते है कुछ ऐसे शब्द, सोचती है लिए आँखो मे पानी 

कौनसा है घर मेरा, कहाँ लिखूँ मैं अपने जीवन की कहानी 


 कुछ ऐसे अल्फाजों से लिखी गयी है नारी की जिन्दगानी

समझ नही पाती वो खुद भी अपनी तक़दीर की कहानी


-दीपिका जैन

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