Hamari Maa / हमारी माँ (Poetry On Mother)

 Hamari Maa / हमारी माँ (Poetry On Mother)    समर्पण भाव होता है उसमे बेहिसाब, सोचती नहीं कभी खुद के लिए  हमारी खुशी है उसके लिए बेहद खास, कोई ओर नहीं वो तो है हमारी माँ     देखा था जब उसने पहली बार हमें आयी थी मुस्कान उसके लबों पे खुशी की  करती है वो जिक्र बार-बार इस लम्हे का, स्वर में उमड़ती है ममता उसके  बस तब से ही है हम दुनिया उसकी, होता है एहसास ये हर पल उसके प्यार से  जताती नहीं पर जानते है हम, कोई हो ना हो लेकिन वो ताउम्र साथ है हमारे     समर्पण भाव होता है उसमे बेहिसाब, सोचती नहीं कभी खुद के लिए  हमारी खुशी है उसके लिए बेहद खास, कोई ओर नहीं वो तो है हमारी माँ     क्या करे क्या ना करे उसकी खुशी के लिए सोचते है ये हर पल हम  लेकिन जानते है बखूबी चुका नहीं पायेंगे उसका कर्ज कभी भी जीवन में  बस रहती हैं ये कोशिशें हमारी, करें उसकी हर ख्वाहिश मुकम्मल दिल से   बना रहे उसका साथ हमेशा, करते रहें सजदा उसका, खुदा से बस यही दुआ करें     समर्पण भाव होता है उसमे बेहिसाब, सोचती नहीं कभी खुद के लिए  हमारी खुशी है उसके लिए बेहद खास, कोई ओर नहीं वो तो है हमारी माँ    -दीपिका जैन


Hamari Maa / हमारी माँ (Poetry On Mother)


समर्पण भाव होता है उसमे बेहिसाब, सोचती नहीं कभी खुद के लिए

हमारी खुशी है उसके लिए बेहद खास, कोई ओर नहीं वो तो है हमारी माँ

 

देखा था जब उसने पहली बार हमें आयी थी मुस्कान उसके लबों पे खुशी की

करती है वो जिक्र बार-बार इस लम्हे का, स्वर में उमड़ती है ममता उसके

बस तब से ही है हम दुनिया उसकी, होता है एहसास ये हर पल उसके प्यार से

जताती नहीं पर जानते है हम, कोई हो ना हो लेकिन वो ताउम्र साथ है हमारे

 

समर्पण भाव होता है उसमे बेहिसाब, सोचती नहीं कभी खुद के लिए

हमारी खुशी है उसके लिए बेहद खास, कोई ओर नहीं वो तो है हमारी माँ

 

क्या करे क्या ना करे उसकी खुशी के लिए सोचते है ये हर पल हम

लेकिन जानते है बखूबी चुका नहीं पायेंगे उसका कर्ज कभी भी जीवन में

बस रहती हैं ये कोशिशें हमारी, करें उसकी हर ख्वाहिश मुकम्मल दिल से

 बना रहे उसका साथ हमेशा, करते रहें सजदा उसका, खुदा से बस यही दुआ करें

 

समर्पण भाव होता है उसमे बेहिसाब, सोचती नहीं कभी खुद के लिए

हमारी खुशी है उसके लिए बेहद खास, कोई ओर नहीं वो तो है हमारी माँ


-दीपिका जैन

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