Asmanjas / असमंजस (Poetry On Life )
असमंजस है बेशुमार ज़िंदगी में ना जाने
क्यों
कहता है दिल कुछ, तो कहता है दिमाग
कुछ
किसकी सुनूँ या ना सुनूँ रहती हूँ
सोचती हर पल
अजब है ये जीवन के फलसफे क्या कहूँ
क्या नहीं
कैसे मुक्कमल हो ख्वाहिशें जब कोई
दिखे ही ना रास्ता
पहुँचने का मंजिल तक, या फिर दिखती
हैं राहें अनगिनीत
कैसी ये कशमकश है करूँ दूर कैसे इसे
आए ना समझ में
दिखती है दूर कभी रोशनी उम्मीद की तो
आता नहीं नजर कुछ
लेकिन बढ़ाने है कदम आगे ही आगे ये
फ़ैसला है अटल
असमंजस है बेशुमार ज़िंदगी में ना जाने
क्यों
कहता है दिल कुछ, तो कहता है दिमाग
कुछ
-दीपिका जैन

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