Besabr Hun Tere Pyar Mein / बेसब्र हूँ तेरे प्यार में (Poetry On Love)
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Besabr Hun Tere Pyar Mein / बेसब्र हूँ तेरे प्यार में (Poetry On Love)
तड़प रहा
हूँ मिलने के लिए तुझसे, ऐसा क्या है रिश्ता तेरा-मेरा
हूँ जानने
के लिए बेसब्र जवाब इसका, कुछ तो कह जुबां से अपनी
क्या
ये इश्क है, गर नहीं तो क्यों है बैचनी तुझसे मिलने की मुझे
क्या
तू भी तरसती है मुझसे मिलने के लिए, या ये प्यार है एकतरफा
बस एक
बार आ रूबरू मेरे, कर रहा हूँ इंतजार तुझसे गुफ्तगू करने का
करनी
है बातें बहुत सारी, माँगने है जवाब अपने सवालों के तुझसे
कुछ तो
दे इशारा या फिर कर इन्कार, या कर इजहार इश्क का
कैसा
है ये इम्तिहान क्यों ले रही है तू, क्या कोई हुई है खता मुझसे
सोचा
ना था ऐसा होगा हाल मोहब्बत में, यूँ तड़पूँगा मैं लगातार
तड़प रहा
हूँ मिलने के लिए तुझसे, ऐसा क्या है रिश्ता तेरा-मेरा
हूँ जानने के लिए बेसब्र जवाब इसका, कुछ तो कह जुबां से अपनी
-दीपिका जैन

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