Meri Bitiya / मेरी बिटिया (Poetry On Girl Child)

Meri Bitiya / मेरी बिटिया (Poetry On Girl Child)     एक दिन आसमां से उतरी परी मेरे घर-आँगन में  आहट उसके कदमों की पड़ती है जब कर्णपटल पे  होता मन प्रसन्न, बिखर जातीं खुशियाँ घर आँगन में  बोली उसकी तुतलाती-सी, पड़ती है जब कर्णपटल पे  करता मन सुनने को बार-बार सबका मेरे घर आँगन में  कभी उसका हँसना खिलखिलाकर, पड़ता है जब कर्णपटल पे  हँसता है हर शख्स साथ उसके दिल से, मेरे घर-आँगन में  जब बहते आँसू उसके, पड़ती आवाज रोने की कर्णपटल पे  रोना उसका बर्दाश्त कर पाता नहीं कोई, मेरे घर-आँगन में  है खुशकिस्मत मेरी बिटिया, पड़ते हैं जब शब्द ये मेरे कर्णपटल पे  करती हूँ आभार सभी का, देने के लिए प्यार उसे, मेरे घर आँगन में  आहट उसके कदमों की पड़ती है जब कर्णपटल पे     -दीपिका जैन

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Meri Bitiya / मेरी बिटिया (Poetry On Girl Child)

 

एक दिन आसमां से उतरी परी मेरे घर-आँगन में

आहट उसके कदमों की पड़ती है जब कर्णपटल पे

होता मन प्रसन्न, बिखर जातीं खुशियाँ घर आँगन में

बोली उसकी तुतलाती-सी, पड़ती है जब कर्णपटल पे

करता मन सुनने को बार-बार सबका मेरे घर आँगन में

कभी उसका हँसना खिलखिलाकर, पड़ता है जब कर्णपटल पे

हँसता है हर शख्स साथ उसके दिल से, मेरे घर-आँगन में

जब बहते आँसू उसके, पड़ती आवाज रोने की कर्णपटल पे

रोना उसका बर्दाश्त कर पाता नहीं कोई, मेरे घर-आँगन में

है खुशकिस्मत मेरी बिटिया, पड़ते हैं जब शब्द ये मेरे कर्णपटल पे

करती हूँ आभार सभी का, देने के लिए प्यार उसे, मेरे घर आँगन में

आहट उसके कदमों की पड़ती है जब कर्णपटल पे

 

-दीपिका जैन 

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