Dard Ishq Mein / दर्द इश्क में (A sad Love Poetry)
Dard
Ishq Mein / दर्द इश्क में (A sad Love
Poetry)
तस्वीर
लिए घूमता-फिरता हूँ हर तरफ ढूँढने को तुझे
कभी जाता
हूँ तेरी गली में, तो कभी भटकता सड़कों पे
मिलती
नहीं तू कहीं भी, फिर भी खोजता हूँ तुझे हर तरफ
हालत
ये देखकर मेरी कहते हैं सब मुझको पागल-प्रेमी
तो कोई
मारता ठोकरें बार-बार, देखता हिकारत भरी नज़रों से
कहता
कोई तो तू नहीं अब इस जहाँ में, भूल जाऊँ तुझे अब मैं
जानता
हूँ, करते हैं ईर्ष्या सब इश्क से हमारे, दुश्मन बेशुमार हमारे
कर ना
फिक्र, हूँ मैं तेरे लिए, आजा बस एक बार रूबरू मेरे सनम
झुठला
दे जमाने को सारे, जो नहीं मोहब्बत का हमारी कद्रदान
तस्वीर
लिए घूमता-फिरता हूँ हर तरफ ढूँढने को तुझे
कभी जाता
हूँ तेरी गली में, तो कभी भटकता सड़कों पे
-दीपिका जैन

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