Chand Aur Dhraa / चाँद और धरा (Poetry On Moonlight)
चाँद
पूनम का आसमां से बिखेर रहा चाँदनी अपनी
समेट
रही धरा आँचल में अपने ये अनमोल सौगात
कभी निहारते
तो कभी बतियाते बातें ढेरों संग ये दोनों
कभी करते
शिकवे-शिकायतें बेवजह ही एक-दूजे से वो
बनते
गवाह तारें अनगिनीत कुछ हँसतें कुछ मुस्काते हुए
सजावट
इस महफ़िल की है अप्रतिम, हटती नहीं नजर इससे
यामिनी
की बेला में भी हो रहा एहसास दिनकर के होने का
सुंदरता
इस द्रश्य की बयां हो नहीं पाए जुबां से यकीनन
शायद
नहीं शब्द शब्दकोश में किसी इस तस्वीर के लिए
अद्भुत
है नज़राना कुदरत का, सर्वश्रेष्ठ है सबसे ये तो
-दीपिका जैन

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