Ae Zindagi / ऐ ज़िंदगी (Poetry On Life)
यूँ ही रात-ओ-दिन गुजर रहे हैं, ऐ ज़िंदगी तुझे समझने में
यकीनन एक पहेली है तू, आती हैं मुश्किलें तुझे
समझने में
कभी लगता आसां है सबकुछ, कभी लगता ड़र तुझे समझने में
कभी आती मुस्कान लबों पे, तो कभी आते आँसू तुझे समझने में
कहते हैं सब, ज़िंदगियाँ गुजर गई लोगों की तुझे समझने में
बावजूद इसके करते हैं कोशिश सब हर वक्त तुझे समझने में
यकीनन वक्त है कीमती, फिर भी गुजरता है तुझे समझने में
मिलेगी नाकामयाबी, जानते हुए भी हर पल गुजरता है तुझे समझने में
यूँ ही रात-ओ-दिन गुजर रहे हैं, ऐ ज़िंदगी तुझे समझने
यकीनन एक पहेली है तू, आती हैं मुश्किलें तुझे समझने मे
-दीपिका जैन

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें