Baras Rahe Badraa Aviraam / बरस रहे बदरा अविराम (Poetry On Rain)
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Baras Rahe Badraa Aviraam / बरस रहे बदरा अविराम (Poetry On Rain)
गरजे बादल, चमकी बिजली, छाने लगा है अँधेरा अविराम
बेहद ही सुहावना मौसम है आज, बरस रहे बदरा अविराम
बूँदें ये पानी की लाई हैं खुशियाँ जीवन में हमारे अविराम
कर रहे थे इंतजार जिनका, बरस रहीं है आज वो अविराम
बगियाँ में देखो खिलने लगे हैं चहुँ ओर पुष्प रंगीले अविराम
गिर बूँदें बारिश की इन पे, बढ़ा रहीं हैं खूबसूरती इनकी अविराम
हरी-हरी दूर्वा भी हो पानी-पानी मुस्कुरा रही है खुशी से अविराम
नाच रहें हैं कहीं मयूर, तो कहीं गा रही हैं गीत कोयल अविराम
पंछी हैं खुश सभी आज, बता रहे हैं अपनी ही भाषा में अविराम
कहीं नाच रहे हैं आँगन में बच्चे, तो कहीं झूला झूलते अविराम
ले रहे हैं आनंद सभी उम्र के लोग सावन की घटा का अविराम
अधूरा है जीवन हमारा बिन वर्षा-ऋतु के, आए ये हर वर्ष अविराम
गरजे बादल, चमकी बिजली, छाने लगा है अँधेरा अविराम
बेहद ही सुहावना मौसम है आज, बरस रहे बदरा अविराम
-दीपिका जैन

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