Sky and Dream / स्काइ एण्ड ड्रीम (Poetry On Night)
Sky and Dream / स्काइ एण्ड
ड्रीम (Poetry On Night)
हर शाम मुझे रात का इंतजार बेसब्र कर जाता है
नींद के आगोश में खो जाने का मन कर जाता है
ख्वाबों की दुनिया में करूँ सैर यही दिल चाहता है
तो कभी ये मन चाँद-सितारों से बातें करना चाहता है
असमंजस में पड़ जाती हूँ, कुछ समझ नहीं आता है
आसमाँ की दुनिया हो या ख्वाबों की दोनों पे दिल आता है
कभी निहारती हूँ फ़लक, तो कभी सपना कोई दिख जाता है
तो कभी सपने में नील-गगन की ओर कदम मेरा बढ़ जाता है
हर शाम मुझे रात का इंतजार बेसब्र कर जाता है
नींद के आगोश में खो जाने का मन कर जाता है
-दीपिका जैन

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें