Pahli Hi Nazar Ka Pyar / पहली ही नज़र का प्यार (Poetry On Love)

Pahli Hi Nazar Ka Pyar / पहली ही नज़र का प्यार  (Poetry On Love)   देखा जब तुझे तो पहली ही नज़र में प्यार हो गया  ढूँढ रहा हूँ हर तरफ़ ना जाने कहाँ मेरा दिल खो गया   वो तेरी ज़ुल्फ़ों का झटकना छत पे, बहुत कुछ कह गया  तेरी मुस्कुराहट का तोहफ़ा भी बिन माँगे मुझे मिल गया  कहूँ कुछ मेरी या सुनूँ कुछ तेरी, इसी कश्मकश में रह गया  ओझल हो गयी तू नज़रों से, और मैं तुझे ढूँढता ही रह गया   देखा जब तुझे तो पहली ही नज़र में प्यार हो गया  ढूँढ रहा हूँ हर तरफ़ ना जाने कहाँ मेरा दिल खो गया   यकीनन दुबारा होंगे दीदार तेरे, ये सोच वापिस लौट गया  जिस्म तो मेरे साथ आ गया, शायद दिल वहीं छूट गया  उस दिन के बाद तुझे एक नज़र देखने को मैं तरस गया  हुई नहीं बर्दाश्त जुदाई तो तेरी ही गली में रहने आ गया    देखा जब तुझे तो पहली ही नज़र में प्यार हो गया   ढूँढ रहा हूँ हर तरफ़ ना जाने कहाँ मेरा दिल खो गया     -दीपिका जैन

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            Pahli Hi Nazar Ka Pyar / पहली ही नज़र का प्यार  (Poetry On Love)


देखा जब तुझे तो पहली ही नज़र में प्यार हो गया

ढूँढ रहा हूँ हर तरफ़ ना जाने कहाँ मेरा दिल खो गया

 वो तेरी ज़ुल्फ़ों का झटकना छत पे, बहुत कुछ कह गया

तेरी मुस्कुराहट का तोहफ़ा भी बिन माँगे मुझे मिल गया

कहूँ कुछ मेरी या सुनूँ कुछ तेरी, इसी कश्मकश में रह गया

ओझल हो गयी तू नज़रों से, और मैं तुझे ढूँढता ही रह गया

 देखा जब तुझे तो पहली ही नज़र में प्यार हो गया

ढूँढ रहा हूँ हर तरफ़ ना जाने कहाँ मेरा दिल खो गया

 यकीनन दुबारा होंगे दीदार तेरे, ये सोच वापिस लौट गया

जिस्म तो मेरे साथ आ गया, शायद दिल वहीं छूट गया

उस दिन के बाद तुझे एक नज़र देखने को मैं तरस गया

हुई नहीं बर्दाश्त जुदाई तो तेरी ही गली में रहने आ गया

  देखा जब तुझे तो पहली ही नज़र में प्यार हो गया 

ढूँढ रहा हूँ हर तरफ़ ना जाने कहाँ मेरा दिल खो गया

 

-दीपिका जैन


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