Chavi Pita Ki / छवि पिता की (Poetry On Father's Day)
छवि पिता की कुछ होती है ऐसी, जताते नही भाव अपने
बस मुस्कुराते हुए हमेशा करते है वो पूरे हमारे सपने
चाहे माँग ले हम उनसे चाँद, बढा देंगे क़दम वो अपने
छू लेंगे आसमां, यकीनन करेंगे वो पूरे हमारे सपने
कहते नही कभी कुछ, बाँटते नही कभी दुख अपने
लगा देते हैं जमा पूंजी अपनी करने को पूरे हमारे सपने
छवि पिता की कुछ होती है ऐसी, जताते नही भाव अपने
बस मुस्कुराते हुए हमेश करते है वो पूरे हमारे सपने
हमारी खुशियों के पीछे, हमेशा छुपा जाते हैं दुख अपने
ना जाने क्यों अक्सर, नजर आते हैं उन्हे हमारे सपने
मिले थे जो सम्पूर्ण जीवन में देते है वो उचित संस्कार अपने
करते हैं कोशिश हो जाए बस हर हाल में पूरे हमारे सपने
छवि पिता की कुछ होती है ऐसी, जताते
नही भाव अपने
बस मुस्कुराते हुए हमेशा करते है वो
पूरे हमारे सपने
Happy Father’s Day
-दीपिका जैन

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