Talash Ek Dost Ki / तलाश एक दोस्त की (Poetry On Friendship)
यूँ तो गुजर रही है ज़िंदगी, पर लगता है कुछ
अधूरा-सा
कहता है दिल, आ जाए जीवन में
एक दोस्त प्यारा-सा
बीत गया बचपन, कुछ शरारतों से
भरा, तो कुछ मासूम-सा
फिर भी कहता था दिल मिल जाए एक दोस्त प्यार- सा
रह गयी तमन्ना ये अधूरी, चला गया बालपन
ख़ाली-सा
आया उम्र का पड़ाव ऐसा ढूँढने लगी आँखें एक दोस्त प्यारा-सा
नज़र ना आया कोई, देखा चहुँ ओर तो
लगता था सब सूना-सा
दे दी दस्तक जवानी ने, पर बन ना सका एक
दोस्त प्यारा-सा
आने लगी जिम्मेदारियाँ कंधों पे, फिर भी लगता कुछ
ठहरा-सा
जवानी भी रही है बीत, नज़र नहीं आ रहा
एक दोस्त प्यारा-सा
गयी हूँ थक ढूँढकर एक शख़्स, बन जाए जो मेरा
हमराज़-सा
दूँ परिचय जिसका ये कहकर, ये तो है एक
दोस्त प्यारा-सा
-दीपिका जैन

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