Mamta Ki Murt / ममता की मूर्त (Poetry On Mother's Day)

 

Mamta Ki Murt  / ममता की मूर्त  (Poetry On Mother's Day)    फूलों-सा कोमल मिजाज, निश्छल-निष्पाप प्रेम उसका  ममता की मूर्त, धरती पे माँ की सूरत में खुदा है वो     करती हूँ सजदा उसका रातों-दिन, झुकाकर सिर अपना  हूँ खुशकिस्मत, मिला है मौका मुझको ये बेशकीमती  पहला स्पर्श उसका नही याद, पर करती हूँ महसूस आज भी  वो है मेरी पहली शिक्षिका, पढ़ाया है पाठ उसने ज़िंदगी का     फूलों-सा कोमल मिजाज, निश्छल-निष्पाप प्रेम उसका  ममता की मूर्त, धरती पे माँ की सूरत में खुदा है वो     अधूरी हूँ मैं उस बिन, है ख्वाहिश रहे साया उसका ताउम्र मुझ पे  ना हो दूर वो पल भर को भी, कोई और नहीं बस यही आरज़ू है मेरी  उस बिन पड़े जीना, आते ही ख्याल ये ज़ेहन में हो जाती हूँ भयभीत  करती हूँ दुआ खुदा से हर पल, कर दे वो मेरी भी ज़िंदगी उसके नाम     फूलों-सा कोमल मिजाज, निश्छल-निष्पाप प्रेम उसका  ममता की मूर्त, धरती पे माँ की सूरत में खुदा है वो     -दीपिका जैन



Mamta Ki Murt  / ममता की मूर्त  (Poetry On Mother's Day) 


फूलों-सा कोमल मिजाज, निश्छल-निष्पाप प्रेम उसका

ममता की मूर्त, धरती पे माँ की सूरत में खुदा है वो

 

करती हूँ सजदा उसका रातों-दिन, झुकाकर सिर अपना

हूँ खुशकिस्मत, मिला है मौका मुझको ये बेशकीमती

पहला स्पर्श उसका नही याद, पर करती हूँ महसूस आज भी

वो है मेरी पहली शिक्षिका, पढ़ाया है पाठ उसने ज़िंदगी का

 

फूलों-सा कोमल मिजाज, निश्छल-निष्पाप प्रेम उसका

ममता की मूर्त, धरती पे माँ की सूरत में खुदा है वो

 

अधूरी हूँ मैं उस बिन, है ख्वाहिश रहे साया उसका ताउम्र मुझ पे

ना हो दूर वो पल भर को भी, कोई और नहीं बस यही आरज़ू है मेरी

उस बिन पड़े जीना, आते ही ख्याल ये ज़ेहन में हो जाती हूँ भयभीत

करती हूँ दुआ खुदा से हर पल, कर दे वो मेरी भी ज़िंदगी उसके नाम

 

फूलों-सा कोमल मिजाज, निश्छल-निष्पाप प्रेम उसका

ममता की मूर्त, धरती पे माँ की सूरत में खुदा है वो

 

-दीपिका जैन 



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