Phoolon Ki Bahar / फूलों की बहार (Poetry On Flowers)

Phoolon Ki Bahar / फूलों की बहार (Poetry On Flowers)     कुछ लिखने की अभिलाषा लिए चल पड़ी मैं उपवन  की ओर  देखा जब चहुँ ओर, खिले हुए थे बेहिसाब रंग-बिरंगे फूल वहाँ     खो गयी मैं इस अद्भुत नज़ारें में, व्याकुल कर रही थी महक इनकी  कभी इन पर मँडराते भँवरों की ध्वनि पड़ रही थी मेरे कर्णपटल पे  रख एक ओर कागज़-कलम निहारने लगी मैं नज़ारा ये अप्रतिम  दर्शनीय थे दृश्य इसके फुर्सत में बनाए हो जैसे किसी चित्रकार ने     कुछ लिखने की अभिलाषा लिए चल पड़ी मैं उपवन  की ओर  देखा जब चहुँ ओर, खिले हुए थे बेहिसाब रंग-बिरंगे फूल वहाँ     एक तरफ़ थी क्यारी गुलाब की तो दूसरी ओर खिल रहे थे कमल  मोगरा, चमेली, रजनीगंधा, गेंदा और सदाबहार भी आ रहे थे नज़र  चंपा, लिली, सूरजमुखी और गुलबहार भी दे रहे थे अपनी हाज़िरी  वास्तव में अतुलनीय था मंज़र ये, अधूरी हैं दुनिया बिन इन फूलों के     कुछ लिखने की अभिलाषा लिए चल पड़ी मैं उपवन  की ओर  देखा जब चहुँ ओर, खिले हुए थे बेहिसाब रंग-बिरंगे फूल वहाँ        -दीपिका जैन



Phoolon Ki Bahar / फूलों की बहार (Poetry On Flowers)

 

कुछ लिखने की अभिलाषा लिए चल पड़ी मैं उपवन  की ओर

देखा जब चहुँ ओर, खिले हुए थे बेहिसाब रंग-बिरंगे फूल वहाँ

 

खो गयी मैं इस अद्भुत नज़ारें में, व्याकुल कर रही थी महक इनकी

कभी इन पर मँडराते भँवरों की ध्वनि पड़ रही थी मेरे कर्णपटल पे

रख एक ओर कागज़-कलम निहारने लगी मैं नज़ारा ये अप्रतिम

दर्शनीय थे दृश्य इसके फुर्सत में बनाए हो जैसे किसी चित्रकार ने

 

कुछ लिखने की अभिलाषा लिए चल पड़ी मैं उपवन  की ओर

देखा जब चहुँ ओर, खिले हुए थे बेहिसाब रंग-बिरंगे फूल वहाँ

 

एक तरफ़ थी क्यारी गुलाब की तो दूसरी ओर खिल रहे थे कमल

मोगरा, चमेली, रजनीगंधा, गेंदा और सदाबहार भी आ रहे थे नज़र

चंपा, लिलीसूरजमुखी और गुलबहार भी दे रहे थे अपनी हाज़िरी

वास्तव में अतुलनीय था मंज़र ये, अधूरी हैं दुनिया बिन इन फूलों के

 

कुछ लिखने की अभिलाषा लिए चल पड़ी मैं उपवन  की ओर

देखा जब चहुँ ओर, खिले हुए थे बेहिसाब रंग-बिरंगे फूल वहाँ

 

-दीपिका जैन 

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