Mili Hain Khushiyan / मिली हैं खुशियाँ (Poetry On Happiness)
एक अर्से बाद मेरे लबों पे आई है मीठी-सी मुस्कान
इंतजार था जिन खुशियों का मुझे, दी है उन्होंने दस्तक
है उलझन कि स्वागत करूँ मैं उनका, या उतारूँ नज़र
देख मुस्कुराऊँ उन्हे, या बहने दूँ आँसू खुशी के आँखों से
देखे हैं अतीत में बेशुमार ग़म इन निगाहों ने ज़िंदगी
में
शायद इसलिए होता नहीं यकीं इन खुशियों पे मेरी नज़रों
को
लेकिन वाकिफ़ हूँ मैं इस बात से ख्वाब नही हक़ीक़त है ये
थी ख्वाहिश जिन खुशियों की मुद्दत से मिली है आज वो किस्मत से
यकीनन करना है सजदा उनका, है बेशकीमती वो मेरे लिए
एक अर्से बाद मेरे लबों पे आई है मीठी-सी मुस्कान
-दीपिका जैन
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