Khushiyan To Yahin Hain / खुशियाँ तो यहीं हैं (Poetry On Happiness)

Khushiyan To Yahin Hain / खुशियाँ तो यहीं हैं (Poetry On Happiness)   मुद्दतों से ढूँढ रही थी खुशियाँ अपने इर्द-गिर्द  ना जाने कहाँ खो गयी थी वो, मिलती ही नही थी  आते थे नज़र तो बस आँसू ही आँसू चहुँ ओर मेरे  कैसी ये विडंबना है सोचती थी लम्हा-लम्हा मैं  आया फिर एक ख्याल ज़ेहन में, और लगी मुस्कुराने  सोचने लगी जो है पास मेरे उसे ही क्यों तलाश रही हूँ  ग़म नाम की धूल पोंछ खुशियों का दीदार क्यों नही कर रहीं हूँ  फिर मिल गयी मुझे वो खुशियाँ जिन्हे एक अर्से से ढूँढ रही थी  साथ ही मिला है सुकून मुझे, अनमोल कुछ पाने का  मुद्दतों से ढूँढ रही थी खुशियाँ अपने इर्द-गिर्द     -दीपिका जैन




Khushiyan To Yahin Hain / खुशियाँ तो यहीं हैं (Poetry On Happiness) 

मुद्दतों से ढूँढ रही थी खुशियाँ अपने इर्द-गिर्द

ना जाने कहाँ खो गयी थी वो, मिलती ही नही थी

आते थे नज़र तो बस आँसू ही आँसू चहुँ ओर मेरे

कैसी ये विडंबना है सोचती थी लम्हा-लम्हा मैं

आया फिर एक ख्याल ज़ेहन में, और लगी मुस्कुराने

सोचने लगी जो है पास मेरे उसे ही क्यों तलाश रही हूँ

ग़म नाम की धूल पोंछ खुशियों का दीदार क्यों नही कर रहीं हूँ

फिर मिल गयी मुझे वो खुशियाँ जिन्हे एक अर्से से ढूँढ रही थी

साथ ही मिला है सुकून मुझे, अनमोल कुछ पाने का

मुद्दतों से ढूँढ रही थी खुशियाँ अपने इर्द-गिर्द

 

-दीपिका जैन


टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट