Pankh Pasare Panchi / पंख पसारे पंछी (Poetry On Birds)
Pankh
Pasare Panchi / पंख पसारे पंछी (Poetry On
Birds)
खुले आसमां में पंख पसारे पंछी उड़ता जाए
अपनी मधुर आवाज़ से वो सबका मन लुभाए
जाए जब वो थक बैठकर पेड़ पे सुकून हैं पाए
चाहे हो नभ या हो धरा दोनों को ही करीब पाए
सखा हैं ये प्रकृति का, सुंदरता को उसकी बढ़ाए
निश्छल-निष्पाप से ये पंछी कितने प्यारे नज़र आए
नृत्य करे मयूर कोई, या कोयल कोई मधुर गीत गाए
या निकाले आवाज़ कर्कश कागा, सभी मन को भाए
खुले आसमां में पंख पसारे पंछी उड़ता जाए
अपनी मधुर आवाज़ से वो सबका मन लुभाए
-दीपिका जैन
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