Adbhut-Atulaneey / अद्भुत-अतुलनीय (Poetry On Nature)

Adbhut-Atulaneey / अद्भुत-अतुलनीय (Poetry On Nature)   बेहद ही ख़ूबसूरत नज़ारा आज मेरी निगाहों के सामने हैं  रंग-बिरंगे फूलों से लदी वादियाँ मेरी निगाहों के सामने हैं      होता नहीं यकीं  मुझे इस अद्भुत, अतुलनीय, नज़ारे पर   सोचता हूँ क्या ये वाकई में हक़ीक़त हैं या कोई ख़्वाब मेरा   सुना था सुंदरता का खज़ाना हैं ये प्रकृति, देख रहा हूँ आज मैं   हो रहा हैं प्रतीत कुछ ऐसा खो रहा था ज़िन्दगी में कुछ अनमोल      बेहद ही ख़ूबसूरत नज़ारा आज मेरी निगाहों के सामने हैं  रंग-बिरंगे फूलों से लदी वादियाँ मेरी निगाहों के सामने हैं     पँछियों का चहकना, बादलों का गर्जना, भौरों का करना गुंजन   लहरों का साहिल से टकराना, पर्वतों का आसमां को चूमना   क्या-क्या लिखूँ, तारीफ़ में इस अनुपम ईश्वरीय तोहफ़े के   कर सकता हूँ बस शुक्रिया बार-बार खुदा का इसके लिए मैं      बेहद ही ख़ूबसूरत नज़ारा आज मेरी निगाहों के सामने हैं  रंग-बिरंगे फूलों से लदी वादियाँ मेरी निगाहों के सामने हैं     -दीपिका जैन


Adbhut-Atulaneey / अद्भुत-अतुलनीय (Poetry On Nature) 

बेहद ही ख़ूबसूरत नज़ारा आज मेरी निगाहों के सामने हैं

रंग-बिरंगे फूलों से लदी वादियाँ मेरी निगाहों के सामने हैं 

 

होता नहीं यकीं  मुझे इस अद्भुत, अतुलनीय, नज़ारे पर 

सोचता हूँ क्या ये वाकई में हक़ीक़त हैं या कोई ख़्वाब मेरा 

सुना था सुंदरता का खज़ाना हैं ये प्रकृति, देख रहा हूँ आज मैं 

हो रहा हैं प्रतीत कुछ ऐसा खो रहा था ज़िन्दगी में कुछ अनमोल 

 

बेहद ही ख़ूबसूरत नज़ारा आज मेरी निगाहों के सामने हैं

रंग-बिरंगे फूलों से लदी वादियाँ मेरी निगाहों के सामने हैं

 

पँछियों का चहकना, बादलों का गर्जना, भौरों का करना गुंजन 

लहरों का साहिल से टकराना, पर्वतों का आसमां को चूमना 

क्या-क्या लिखूँ, तारीफ़ में इस अनुपम ईश्वरीय तोहफ़े के 

कर सकता हूँ बस शुक्रिया बार-बार खुदा का इसके लिए मैं 

 

बेहद ही ख़ूबसूरत नज़ारा आज मेरी निगाहों के सामने हैं

रंग-बिरंगे फूलों से लदी वादियाँ मेरी निगाहों के सामने हैं

 

-दीपिका जैन

 


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