Taarif Mein Teri / तारीफ में तेरी (Poetry On Love)

Taarif Mein Teri / तारीफ में तेरी (Poetry On Love)  नज़्म लिख रहा हूँ तारीफ़ में तेरी, तोहफ़ा हैं ये मेरी ओर से  कश्मकश हैं की क्या लिखूँ, क्या ना लिखूँ, कैसे करूँ मैं पेश  तेरी जुल्फ़ों की तारीफ़ लिखूँ, या करूँ तेरी आँखों का वर्णन  सोचता हूँ शुरुआत तेरे लबों से करूँ, या गालों के डिंपल से  लेकिन अधूरी हैं ये नज़्म लिखे बिना कुछ तेरी सीरत के बारे में  लगता हैं कुछ ऐसा होगी नहीं मुकम्मल नज़्म ये क़लम से मेरी  यक़ीनन असमंजस में हूँ किसका मैं बखान करूँ नज़्म में अपनी  तेरी सूरत को दूँ अहमियत, या तेरी सीरत की करूँ में प्रशंसा  नज़्म लिख रहा हूँ तारीफ़ में तेरी, तोहफ़ा हैं ये मेरी ओर से  कश्मकश हैं की क्या लिखूँ, क्या ना लिखूँ, कैसे करूँ मैं पेश     -दीपिका जैन


Taarif Mein Teri / तारीफ में तेरी (Poetry On Love)

नज़्म लिख रहा हूँ तारीफ़ में तेरी, तोहफ़ा हैं ये मेरी ओर से

कश्मकश हैं की क्या लिखूँ, क्या ना लिखूँ, कैसे करूँ मैं पेश

तेरी जुल्फ़ों की तारीफ़ लिखूँ, या करूँ तेरी आँखों का वर्णन

सोचता हूँ शुरुआत तेरे लबों से करूँ, या गालों के डिंपल से

लेकिन अधूरी हैं ये नज़्म लिखे बिना कुछ तेरी सीरत के बारे में

लगता हैं कुछ ऐसा होगी नहीं मुकम्मल नज़्म ये क़लम से मेरी

यक़ीनन असमंजस में हूँ किसका मैं बखान करूँ नज़्म में अपनी

तेरी सूरत को दूँ अहमियत, या तेरी सीरत की करूँ में प्रशंसा

नज़्म लिख रहा हूँ तारीफ़ में तेरी, तोहफ़ा हैं ये मेरी ओर से

कश्मकश हैं की क्या लिखूँ, क्या ना लिखूँ, कैसे करूँ मैं पेश

 

-दीपिका जैन 


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