Avismaraneey Bachpan / अविस्मरणीय बचपन (Poetry On Children Day)
बचपन,
बेहद ही ख़ूबसूरत पड़ाव होता हैं ये इंसा के जीवन का
पाता नहीं वो भूल उन पलों को जुड़ी
हैं यादें जिनसे उसके बचपन की
कहीं ना कहीं रहता हैं उसमे बचपन थोड़ा-सा चाहे हो जाये वो बड़ा
दोस्तों संग ढ़ेर सारी शैतानियाँ, मासूम सी बदमाशियाँ, भुलाए नहीं भूलती
किये गए कारनामों की वजह से पड़ी पिता की डांट रहती हैं याद हमेशा
लेकिन वो बचाना माँ का और लेना छुपा आँचल में अपने निःशब्द हैं
भाई-बहनों को सताना बेवज़ह एक अलग ही हैं आनंद उस लम्हें का
रह जाता हैं बचपन अधूरा बिन सुने दादी-नानी की कहानियाँ
बचपन,
बेहद ही ख़ूबसूरत पड़ाव होता हैं ये इंसा के जीवन का
पाता नहीं वो भूल उन पलों को जुड़ी
हैं यादें जिनसे उसके बचपन की
-दीपिका जैन

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