Zindagi Ek Paheli / ज़िंदगी एक पहेली (Poetry On Life)
Zindagi Ek Paheli / ज़िंदगी एक पहेली (Poetry On Life)
गुजरा हुआ हर पल ज़िंदगी का कुछ ऐसा कह जाता
हैं
रह जाता हैं याद वो, हो जाता हैं नामुमकिन भूलना उसे
होती हैं उसमे बातें ढ़ेर सारी, कुछ मीठी, तो कुछ खट्टी
इन्ही खट्टी-मीठी बातों की जुगलबंदी से बनती
हैं ज़िंदगी
ज़िंदगी को समझना यूँ तो नहीं आसां किसी के
लिए भी
फिर भी चाहता हैं समझना हर एक इंसा उसे
शिद्दत से
मिलती हैं जब नाकामयाबी ज़िंदगानी को समझने
में उसे
रह जाता हैं मुस्कुरा के और लगता हैं सहेजने
यादों को वो
गुजरा हुआ हर पल ज़िंदगी का कुछ ऐसा कह जाता
हैं
रह जाता हैं याद वो, हो जाता हैं नामुमकिन भूलना उसे
-दीपिका जैन

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