Naazuk Rishte / नाजुक रिश्ते (Poetry On Relationship)


Naazuk Rishte / नाजुक रिश्ते (Poetry On Relationship)     बड़े ही नाजुक होते हैं रिश्ते, सोच-समझकर पड़ते हैं निभाने  एक छोटी-सी भूल भी, ड़ाल देती है दरार इन नाजुक रिश्तों पे  रखना पड़ता है काबू जुबां पे अपनी, नहीं तो बिखर जाते हैं ये  मिल नहीं जाता हक आपको बदजुबानी करने का चाहे आप हो बढ़े  छोटों की भी भावनाओं को लगती है चोट, ये बात भी समझ लो  और छोटों को करना पड़ता है लिहाज बड़ा का हमेशा दिल से  सुना है हमेशा बुजुर्गों से अपने, रिश्ते तोड़ना होता है आसां  लेकिन निभाना बेहद ही मुश्किल, लेकिन जरूरी है निभाना इन्हे  क्योंकि होते हैं ये अनमोल, कीमत जानता है इनकी वही  जिनके पास होते नहीं ये, बड़े ही नाजुक होते हैं रिश्ते     -दीपिका जैन



Naazuk Rishte / नाजुक रिश्ते (Poetry On Relationship)

 

बड़े ही नाजुक होते हैं रिश्ते, सोच-समझकर पड़ते हैं निभाने

एक छोटी-सी भूल भी, ड़ाल देती है दरार इन नाजुक रिश्तों पे

रखना पड़ता है काबू जुबां पे अपनी, नहीं तो बिखर जाते हैं ये

मिल नहीं जाता हक आपको बदजुबानी करने का चाहे आप हो बढ़े

छोटों की भी भावनाओं को लगती है चोट, ये बात भी समझ लो

और छोटों को करना पड़ता है लिहाज बड़ा का हमेशा दिल से

सुना है हमेशा बुजुर्गों से अपने, रिश्ते तोड़ना होता है आसां

लेकिन निभाना बेहद ही मुश्किल, लेकिन जरूरी है निभाना इन्हे

क्योंकि होते हैं ये अनमोल, कीमत जानता है इनकी वही

जिनके पास होते नहीं ये, बड़े ही नाजुक होते हैं रिश्ते

 

-दीपिका जैन

 


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