Phool Gulab Ka / फूल गुलाब का (Poetry On Rose Flowers)

Phool Gulab Ka / फूल गुलाब का (Poetry On Rose Flowers)     सुंदरता का प्रतीक हैं ये, और उपवन की शान  कहते हैं इसे राजा फूलों का, हैं ये फूल गुलाब का      सुगंध इसकी भाती मन को, लगता सबको प्यारा ये   ख़ुशियों में करते याद इसको, ग़म में भी निभाता साथ ये   हर क़दम ज़िन्दगी में रहती इसकी दरकार सबको   इंसा तो क्या भँवरे भी करते सज़दा इसका दिल से      सुंदरता का प्रतीक हैं ये, और उपवन की शान  कहते हैं इसे राजा फूलों का, हैं ये फूल गुलाब का      करते हैं इसके द्वारा प्रेमी इज़हार प्रेम का मेहबूब से अपने   हर रंग के गुलाब की होती अहमियत अपनी प्रेमियों के लिए   अब और क्या कहूँ तारीफ़ में इसकी, शब्द नहीं हैं पास मेरे   शायद इतना ही परिचय पर्याप्त हैं गुलाब का बताने को तुम्हे      सुंदरता का प्रतीक हैं ये, और उपवन की शान  कहते हैं इसे राजा फूलों का, हैं ये फूल गुलाब का      -दीपिका जैन

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Phool Gulab Ka / फूल गुलाब का (Poetry On Rose Flowers)

 

सुंदरता का प्रतीक हैं ये, और उपवन की शान

कहते हैं इसे राजा फूलों का, हैं ये फूल गुलाब का 

 

सुगंध इसकी भाती मन को, लगता सबको प्यारा ये 

ख़ुशियों में करते याद इसको, ग़म में भी निभाता साथ ये 

हर क़दम ज़िन्दगी में रहती इसकी दरकार सबको 

इंसा तो क्या भँवरे भी करते सज़दा इसका दिल से 

 

सुंदरता का प्रतीक हैं ये, और उपवन की शान

कहते हैं इसे राजा फूलों का, हैं ये फूल गुलाब का 

 

करते हैं इसके द्वारा प्रेमी इज़हार प्रेम का मेहबूब से अपने 

हर रंग के गुलाब की होती अहमियत अपनी प्रेमियों के लिए 

अब और क्या कहूँ तारीफ़ में इसकी, शब्द नहीं हैं पास मेरे 

शायद इतना ही परिचय पर्याप्त हैं गुलाब का बताने को तुम्हे 

 

सुंदरता का प्रतीक हैं ये, और उपवन की शान

कहते हैं इसे राजा फूलों का, हैं ये फूल गुलाब का 

 

-दीपिका जैन 

 

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