Barkha Bahaar / बरखा बहार (Poetry On Rain)
Barkha
Bahaar / बरखा बहार (Poetry On Rain)
ऋतु सावन की आए रे, बरखा बहार लाए रे
मेघों की गर्जन देखो सन्देश ख़ुशी का सुनाए रे
आसमां पे कड़कड़ाती बिजली शोर मचाए रे
बारिश की बूँदें गिर धरा पे माटी महकाए रे
सोंधी-सोंधी महक माटी की सबके
मन को भाए रे
नाचे मयूर झूम-झूमकर, मधुर गीत कोयल सुनाए रे
कितना मनभावन हैं दृश्य ये, सबके मन को लुभाए रे
वर्षा का मौसम ये मुस्कान हर चेहरे पर लाए रे
दिलों में सबके उम्मीदें बेशुमार जगाए रे
ऋतु सावन की आए रे, बरखा बहार लाए रे
मेघों की गर्जन देखो सन्देश ख़ुशी का सुनाए रे
-दीपिका जैन

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