Zindagi Ne Sikhaya Hain / ज़िंदगी ने सिखाया है (Poetry On Life)
Zindagi Ne Sikhaya Hain / ज़िंदगी ने सिखाया है (Poetry On Life)
ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सिखाया, और समझाया हैं
तरह-तरह के लोगों से उसने मुझे मिलवाया हैं
कोई लगा मुझे अपना-सा, तो कोई लगा पराया-सा
कोई अपना होकर भी पराया, तो कोई पराया होकर भी अपना
अजीब कश्मकश थी, समझाना था लोगों को मुश्किल
और उससे भी जटिल था जानना उनके मन की बात
करते थे सब बातें मीठी-मीठी, देती थी जो मन को सुकून
लेकिन कोई दिल से, तो कोई लिए दिल में कड़वाहट
उठता था ये सवाल मन में, क्यों हैं दुनिया में ऐसे लोग
क्यों कर रहे हैं ये इस खूबसूरत कायनात को
दूषित
आई फिर एक आवाज़ जिसने कहा मुझे समझाते हुए
कोई कैसा हैं अहम् ये नहीं, तुम कैसे हो अहम् ये हैं
बस यही फ़लसफ़ा सिखाया हैं इस खूबसूरत ज़िंदगी ने
तरह-तरह के लोगों से मिलवाया हैं जीवन के इस
सफर में मुझे
-दीपिका जैन

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें