Yamini Ki Bela / यामिनी की बेला (Poetry On Night)
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Yamini
Ki Bela / यामिनी की बेला (Poetry On
Night)
निकल आया चाँद फ़लक पे, बिखर गयी चाँदनी चहुँ ओर
मंद-मंद मुस्कुराने लगे हैं सितारें भी आसमां पे बेशुमार
दूर्वा पे बिखरी हैं बूँदें शबनम की, अतुलनीय नज़ारा हैं ये
चल रही हैं हवाएँ शीतल-शीतल,
हो रहा हैं मन प्रफुल्लित
यक़ीनन बेहद ही खूबसूरत और ख़ामोश लगती ये रात
हैं
किसी शायर की शायरी सा कोमल इसका हैं मिज़ाज़
मधुर संगीत की धुन कोई, ना जाने आ रही हैं याद
खत्म ना हो यामिनी की ये बेला, दिल की हैं ये आवाज़
निकल आया चाँद फ़लक पे, बिखर गयी चाँदनी चहुँ ओर
मंद-मंद मुस्कुराने लगे हैं सितारें भी आसमां पे बेशुमार
-दीपिका जैन

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