Yamini Ki Bela / यामिनी की बेला (Poetry On Night)


Yamini Ki Bela / यामिनी की बेला (Poetry On Night)     निकल आया चाँद फ़लक पे, बिखर गयी चाँदनी चहुँ ओर  मंद-मंद मुस्कुराने लगे हैं सितारें भी आसमां पे बेशुमार  दूर्वा पे बिखरी हैं बूँदें शबनम की, अतुलनीय नज़ारा हैं ये  चल रही हैं हवाएँ शीतल-शीतल, हो रहा हैं मन प्रफुल्लित  यक़ीनन बेहद ही खूबसूरत और ख़ामोश लगती ये रात हैं  किसी शायर की शायरी सा कोमल इसका हैं मिज़ाज़  मधुर संगीत की धुन कोई, ना जाने आ रही हैं याद  खत्म ना हो यामिनी की ये बेला, दिल की हैं ये आवाज़  निकल आया चाँद फ़लक पे, बिखर गयी चाँदनी चहुँ ओर  मंद-मंद मुस्कुराने लगे हैं सितारें भी आसमां पे बेशुमार      -दीपिका जैन

                                          Image by Bruno /Germany from Pixabay 


Yamini Ki Bela / यामिनी की बेला (Poetry On Night)

 

निकल आया चाँद फ़लक पे, बिखर गयी चाँदनी चहुँ ओर

मंद-मंद मुस्कुराने लगे हैं सितारें भी आसमां पे बेशुमार

दूर्वा पे बिखरी हैं बूँदें शबनम की, अतुलनीय नज़ारा हैं ये

चल रही हैं हवाएँ शीतल-शीतल, हो रहा हैं मन प्रफुल्लित

यक़ीनन बेहद ही खूबसूरत और ख़ामोश लगती ये रात हैं

किसी शायर की शायरी सा कोमल इसका हैं मिज़ाज़

मधुर संगीत की धुन कोई, ना जाने आ रही हैं याद

खत्म ना हो यामिनी की ये बेला, दिल की हैं ये आवाज़

निकल आया चाँद फ़लक पे, बिखर गयी चाँदनी चहुँ ओर

मंद-मंद मुस्कुराने लगे हैं सितारें भी आसमां पे बेशुमार

 

-दीपिका जैन 

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