Gar Naa Hoti Naari Toh / अगर ना होती नारी तो (Poetry On Women's Day)

Gar Naa Hoti Naari Toh / अगर ना होती नारी तो (Poetry On Women's Day)     गर ना होती नारी तो, होता ना मनुष्य धरा पे  जननी हैं वो हमारी, ईश्वर का रूप हैं वो दूसरा  आदरणीय हैं हर रूप उसका, चाहे माँ हो या पत्नी  या फिर हो बहन, भाभी, बुआ, चाची, मामी या मौसी  यूँ तो माँगती नहीं वो कभी भी कुछ अपने लिए  पर अपनों की ख़ुशियाँ होती हैं अहम् उसके लिए  प्रभु का सर्वश्रेष्ठ सर्जन हैं वो, उसके जैसा कोई ओर नहीं  अब क्या कहे, शब्द नहीं पास हमारें कहने को कुछ  हक़ीक़त में तो बिन नारी अधूरी हैं ये दुनिया सारी  जननी हैं वो हमारी, ईश्वर का रूप हैं वो दूसरा     -दीपिका जैन



Gar Naa Hoti Naari Toh / अगर ना होती नारी तो (Poetry On Women's Day)

 

गर ना होती नारी तो, होता ना मनुष्य धरा पे

जननी हैं वो हमारी, ईश्वर का रूप हैं वो दूसरा

आदरणीय हैं हर रूप उसका, चाहे माँ हो या पत्नी

या फिर हो बहन, भाभी, बुआ, चाची, मामी या मौसी

यूँ तो माँगती नहीं वो कभी भी कुछ अपने लिए

पर अपनों की ख़ुशियाँ होती हैं अहम् उसके लिए

प्रभु का सर्वश्रेष्ठ सर्जन हैं वो, उसके जैसा कोई ओर नहीं

अब क्या कहे, शब्द नहीं पास हमारें कहने को कुछ

हक़ीक़त में तो बिन नारी अधूरी हैं ये दुनिया सारी

जननी हैं वो हमारी, ईश्वर का रूप हैं वो दूसरा

 

-दीपिका जैन 

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