Dhundta Hun Tujhe / ढूँढता हूँ तुझे (Poetry On Love)

Dhundta Hun Tujhe / ढूँढता हूँ तुझे (Poetry On Love)     तेरी आँखों की गुस्ताखियों ने चैन मेरा कुछ इस क़दर था छीना  आता नहीं नज़र अब कोई मुझे तेरे सिवा, तू ही बता क्या करूँ  भूल जाऊँ तुझे मुमकिन नहीं और पाना तुझे आसां नहीं मेरे लिए  पूछता हूँ ज़माने से पता तेरे आशियानें का, पर लौट आता हूँ खाली हाथ  तू ही बता क्या करूँ मैं, जीऊँ या मर जाऊँ तेरे इश्क़ में सनम  तू मिलेगा या नहीं मुझे, जवाब नहीं इस सवाल का पास मेरे  फिर भी ढूँढ़ता हूँ बावला सा तुझे कभी यहाँ तो कभी वहाँ  होता नहीं इंतज़ार अब मुझसे आ भी जा तू ज़िदगी में मेरी  और बन जा मेरी प्रेमिका, तुझ बिन नहीं ये ज़िन्दगी अब आसां  तेरी आँखों की गुस्ताखियों ने चैन मेरा कुछ इस क़दर था छीना  आता नहीं नज़र अब कोई मुझे तेरे सिवा, तू ही बता क्या करूँ      -दीपिका जैन


                                 Image by Arifur Rahman Tushar from Pixabay 


Dhundta Hun Tujhe / ढूँढता हूँ तुझे (Poetry On Love)

 

तेरी आँखों की गुस्ताखियों ने चैन मेरा कुछ इस क़दर था छीना

आता नहीं नज़र अब कोई मुझे तेरे सिवा, तू ही बता क्या करूँ

भूल जाऊँ तुझे मुमकिन नहीं और पाना तुझे आसां नहीं मेरे लिए

पूछता हूँ ज़माने से पता तेरे आशियानें का, पर लौट आता हूँ खाली हाथ

तू ही बता क्या करूँ मैं, जीऊँ या मर जाऊँ तेरे इश्क़ में सनम

तू मिलेगा या नहीं मुझे, जवाब नहीं इस सवाल का पास मेरे

फिर भी ढूँढ़ता हूँ बावला सा तुझे कभी यहाँ तो कभी वहाँ

होता नहीं इंतज़ार अब मुझसे आ भी जा तू ज़िदगी में मेरी

और बन जा मेरी प्रेमिका, तुझ बिन नहीं ये ज़िन्दगी अब आसां

तेरी आँखों की गुस्ताखियों ने चैन मेरा कुछ इस क़दर था छीना

आता नहीं नज़र अब कोई मुझे तेरे सिवा, तू ही बता क्या करूँ

 

-दीपिका जैन 

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