Kya Kahun Kaise Kahun / क्या कहूँ कैसे कहूँ ( Poetry On Valentine Day)

 

Kya Kahun Kaise Kahun / क्या कहूँ कैसे कहूँ ( Poetry On Valentine Day)     क्या कहूँ, कैसे कहूँ, इश्क़ का अपने कैसे इज़हार करूँ  दिल में हैं जो जज्बात उन्हें अल्फाज़ों में कैसे तब्दील करूँ  ये सच हैं कि करते हैं हम मोहब्बत बेपनाह तुझसे ऐ सनम  पर ड़रते हैं ज़माने से खुद के लिए नहीं तेरे बेआबरू होने से  करते हैं गुजारिश तुझसे कहना ना तू कभी बेवफा हमें  बस इंतज़ार हैं तो उस लम्हें का जो बना हो हमारें लिए  क्या कहूँ, कैसे कहूँ, इश्क़ का अपने कैसे इज़हार करूँ  दिल में हैं जो जज्बात उन्हें अल्फाज़ों में कैसे तब्दील करूँ     -दीपिका जैन

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Kya Kahun Kaise Kahun / क्या कहूँ कैसे कहूँ ( Poetry On Valentine Day)

 

क्या कहूँ, कैसे कहूँ, इश्क़ का अपने कैसे इज़हार करूँ

दिल में हैं जो जज्बात उन्हें अल्फाज़ों में कैसे तब्दील करूँ

ये सच हैं कि करते हैं हम मोहब्बत बेपनाह तुझसे ऐ सनम

पर ड़रते हैं ज़माने से खुद के लिए नहीं तेरे बेआबरू होने से

करते हैं गुजारिश तुझसे कहना ना तू कभी बेवफा हमें

बस इंतज़ार हैं तो उस लम्हें का जो बना हो हमारें लिए

क्या कहूँ, कैसे कहूँ, इश्क़ का अपने कैसे इज़हार करूँ

दिल में हैं जो जज्बात उन्हें अल्फाज़ों में कैसे तब्दील करूँ

 

-दीपिका जैन

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