Dosti_ Ek rishta Pyara Sa / दोस्ती_ एक रिश्ता प्यारा सा (Poetry On Friendship)
Dosti_ Ek rishta Pyara Sa / दोस्ती_ एक रिश्ता प्यारा सा (Poetry On
Friendship)
दोस्ती, एक रिश्ता हैं ये प्यारा सा, फ़र्ज़ हैं ये उम्र भर
निभाने का
कभी लड़ते हैं तो, कभी मनाते हैं एक दूसरे को सच्चे दोस्त
पर टूटता नहीं रिश्ता उनका, गुज़र जाते हैं ज़माने कई
किन लफ़्ज़ों में बयां करूँ इस रिश्ते को मैं सामने आपके
कभी लगता हैं शायर की शायरी सा, तो कभी संगीत मधुर
कभी लगता हैं फूलों सा कोमल, तो कभी पर्वत सा कठोर
सुख-दुःख का साथी होता हैं ये, इस पर रिश्ते कई कुर्बान
कहते हैं तक़दीर वाले होते हैं वो
जिनके होते हैं सच्चे दोस्त
सच हैं ये आसां नहीं मिलना दुनिया में साथ निभाने वाले दोस्त
दोस्ती, एक रिश्ता हैं ये प्यारा सा, फ़र्ज़ हैं ये उम्र भर
निभाने का
कभी लड़ते हैं तो, कभी मनाते हैं एक दूसरे को सच्चे दोस्त
-दीपिका जैन

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें